प्रेशर स्विच क्या होता है:—- प्रेशर स्विच मेकेनिकल और इलेक्ट्रॉनिक दोनों तरह की होती है। इसका प्रयोग हम किसी एयर प्रेशर, तरल पदार्थ का दबाव, गैस का प्रेशर आदि को नियंत्रित करने के लिए करते हैं जैसे हम इसके range को जितने kg या psi पर सेट कर देंगे उस से अधिक प्रेशर पर जाने के बाद ये डिवाइस को निष्क्रिय कर देगा अर्थात बंद कर देगा NC को NO कर देगा जिस से की सप्लाई कट जाएगी और डिवाइस बंद हो जाएगी नुकसान होने से बच जाएगा।
उपयोग:—
1. इसका उपयोग एयर कंप्रेशर।
2. हाइड्रोलिक सिस्टम।
3. अग्निशमन यंत्र में किया जाता है।
जैसे आपको पता है कि प्रेशर कम होने पर ये निष्क्रिय हो जाता है NO,NC बन जाता है इस विधि का प्रयोग अग्निशमन यंत्र के सिस्टम में किया जाता है।
अब आपको बताएंगे कि इसके अंदर के पार्ट्स कैसे काम करते हैं इसके inlet पाईप के ऊपर एक कॉपर या रबर कि bellwos होता है जिसमें तेल भरता है तो ये फूलने लग जाता हैऔर स्प्रिंग दबने लग जाती है जिससे कि प्रेशर रेंज की सुई सेट प्वाइंट से ऊपर उठ जाती है फिर इसकी कनेक्शन टर्मिनल मैटेलिक पत्तियां NC से NO हो जाती हैं तो डिवाइस बंद हो जाती हैं। इसके प्रेशर को कम करने के लिए इसके एडजस्ट वाल्व को सेट किया जाता है ।
एनर्जी मीटर:- एनर्जी मीटर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो बिजली की खपत और उत्पादन की निगरानी रखता है। यह बिजली की खपत को kwh किलो वॉट घंटा में मापता है जिससे कि हमारे घरों कारखानों या कमर्शियल संस्थानों का इसके अनुसार ही बिल बनता है।
Rear panel
अब आपको मै एनर्जी मीटर का कनेक्शन कैसे करते हैं चित्र के माध्यम से दिखाता हूं। इसके कनेक्शन से जुडी सारी बातें डिटेल में बताई गईं हैं। किन-किन बातों का ध्यान रखना है सावधानियां क्या क्या करनी है।
ऊपर चित्र में दिखाया गया है। जो करेंट इनपुट है ओ A1, A2, A3 दर्शाया गया है और उसमें s1,S2 है जो CT के तारों को लगाने का टर्मिनल है। CT को current transfarmer कहते हैं जो लोड को एम्पीयर में मापता है और मीटर में दर्शाता है कि लोड पर कितना एम्पीयर चल रहा है,CT में दो तारे होती हैं एक लाल और दूसरी काली, लाल को s1 टर्मिनल पर लगाते हैं काली को s2 पर जैसा की चित्र में दिखाया गया है। ध्यान देने योग्य बातें 1. आपने ऊपर देखा होगा कि CT के सेकेंडरी वायर को शॉर्ट किया गया हैं क्योंकि CT को कभी खुला नहीं छोड़ना चाहिए जब हम सप्लाई पर CT को लगाते हैं तो इसमें मैगनेटिक फ्लैक्स जनरेट होता है जिससे कि सेकंडरी वाइंडिंग में उच्च वोल्टेज हो जाती है इंसुलेशन टूट जाते हैं धमाका भी हो सकता है आस-पास के लोगों को चोट भी लग सकती है। 2.CT के ऊपर B1 और B2 लिखा होता है इसका मतलब यह है कि जब हम CT को उस फेज की तार में से गुजारते हैं जिसका हमें करेंट मापना है तो उस तार का इनपुट CT के B1 के तरफ से गुजारे B2 की तरफ से बाहर निकाले। 3.CT को हमेशा जिस फीडर का करेंट मापना है उसके DD या MCCB के आउट पुट पर ही लगाना है। सावधानियां 1.CT का कनेक्शन करते समय सप्लाई ऑफ कर दे।
लिमिट स्विच एक इलेक्ट्रो मेकेनिकल स्विच है। ये किसी भी इलेक्ट्रिकल से चलने वाली डिवाइस जैसे मोटर हाइड्रोलिक सिलेंडर आदि को एक निश्चित ऊंचाई और निश्चित दूरी को नियंत्रित करके उनकी दिशा में परिवर्तन कर देता। इसी को लिमिट स्विच कहते हैं।
कैसे काम करता है:–
जैसे कि आप लोग ऊपर दिखाए गए चित्र में देख रहे होंगे कि job slider metal लिखा है असल में ये लोहे की छड़ या प्लेट कह लेते हैं जब लिमिट स्विच काम में आती है तो मोटर या सिलेंडर चलने लग जाती है तो ये लोहे की प्लेट लिमिट के लीवर के ऊपर जो रोलर लगा हुआ है उसके ऊपर से गुजरती है तो लीवर नीचे दब जाती है लीवर के नीचे एक नॉब बॉल है ओ भी साथ मे दबती है जिसे की इसके अंदर लगी हुई पत्तियां NO, NC बनती हैं जिससे कि मोटर या सिलेंडर की दिशा में परिवर्तन होता रहता है। जब तक ये ऑफ पोजिशन में रहेगा NO,NC अपने पोजिशन में रहेंगे जैसे ही इसकी नॉब बॉल दबेगी NO,NC बन जाएगी NC, NO बन जाएगी चित्र में आपको इसके इंटरनल पार्ट्स को भी दिखाया गया है।
इसके कॉन्टेक्ट पत्तियों के कुछ सिंबल दिखाए गए हैं
उपयोग:- – –
1. इसका उपयोग वाशिंग मशीनों के ड्रायर में किया जाता है जब तक ड्रायर के ढक्कन को बंद नहीं करेंगे तब तक ड्रायर नहीं चलेगा।
2. रेफ्रिजरेटर में जैसे हम डोर को खोलते है लाइट जल जाती है इसमें लिमिट स्विच का उपयोग हुआ रहता है।
3. कारखानों में चलने वाली मशीनों में इंटरलॉक के रूप में की हुई होती है जब तक लिमिट लगी रहेगी मशीन नहीं चलेगी।
आइसोलेटर एक प्रकार का स्विच है जो बिजली की सप्लाई को सर्किट से अलग करता है अर्थात सर्किट को जोड़ता और तोड़ता है। जिससे कि हम सर्किट पर आसानी से काम कर सकते हैं। ये भी 2पोल, 3पोल, 4पोल में MCB की तरह होती है और मार्केट में आसानी से मिल जाती है इंस्टॉल करने में आसानी होती है और खराब होने के बाद आसानी से बदला जा सकता है इसकी बनावट भी MCB की तरह ही होती है उस पर लिखा होता है आइसोलेटर MCB मत समझ लेना। जैसा कि चित्र में दिखाया गया है ।
उपयोग: इसका उपयोग हम औद्योगिक क्षेत्रों में स्विच की तरह करते हैं।
2. इसका उपयोग LT लाइन से लेकर HT लाइन और सब स्टेशन में पावर काटने के लिए किए जाते है। पर पावर के अनुसार इनकी बनावट अलग अलग हो सकती है जैसे कि चित्र में दिखाया गया है
Isolator
महत्त्वपूर्ण बातें –इसकी खास बात यह है कि ये MCB की तरह ये शॉर्ट सर्किट, ओवर लोड पर ऑटोमैटिक ट्रिप नहीं करती इसको मैनुअल ऑन ऑफ करना पड़ता है।
MPCB क्या है। इसका फूल फॉर्म क्या होता है। इसका उपयोग कहां होता है?
MPCB का फूल फॉर्म होता है (motor protection cercuit breaker) ये स्पेशल मोटर के ऑपरेशन के लिए ही बनाया गया है। ये मोटर के फुल लोड करेंट के अनुसार ही सलेक्ट किया जाता है। ये ओवर लोड, शॉर्ट सर्किट, वोल्टेज की अस्थिरता आदि होने पर सर्किट को ब्रेक कर देता है जिससे कि मोटर जलने से बच जाती है। ये,3पोल,2पोल में आती हैं ये अलग – अलग कंपनी की हो सकती है आकर में छोटा बड़ा हो सकता है। चित्र में seimens का दिखाया गया है।
चित्र में आप देख सकते हो
1.पावर इनपुट,-– इसमें पावर को इनपुट किया जाता है।
2. आउटपुट– इसमें से पावर का इनपुट निकलता है जो सीधा मोटर के साथ कनेक्ट होती है।
3. सिलेक्टर नॉब —इसके नॉब को ऑन पोजीशन पर सेलेक्ट करोगे तो mpcb आउटपुट निकलेगी। अगर मोटर पर काम करना है तो नॉब को off पोजीशन पर सेलेक्ट कर दो तो आउटपुट निकालन बंद कर देगी फिर आप आराम बिना खतरे का काम कर सकते हो। अगर किसी कारण से mpcb ट्रिप कर जाती है तो इसका नॉब ट्रिप पोजीशन पर आ जाएगी ट्रिप लिखा होगा।
4.auxillary टर्मिनल
Auxillary टर्मिनल में NO/NC टर्मिनल होते हैं जिससे आपउसको सर्किट में लेकर on/off/trip आदि का इंडिकेशन लगा सकते हैं।
5. टेस्ट
Mpcb के ऊपर एक घाट बना हुआ है जिस पर टेस्ट लिखा हुआ है पहले आप नॉब को ऑन पोजीशन पर सेलेक्ट करो फिर उस टेस्ट पर टेस्टर से प्रेस करोगे तो नॉब खिसक के ट्रिप पर आ जाएगी। इससे आप mpcb की सही गलत का पता लगा सकते हो।
6. एम्पीयर सेटिंग
सबसे महत्त्वपूर्ण है एम्पीयर सेटिंग आप मोटर के फुल लोड करेंट के अनुसार एम्पीयर पर सेट करो जितने एम्पीयर पर इसको सेट करोगे उससे ऊपर करेंट जाने पर mpcb ट्रिप कर जाएगी और आपको ट्रिप इंडिकेशन दिखा जाएगा हमेशा ट्रिप इंडिकेशन पीले रंग का होना चाहिए जो कि स्टैंडर्ड है।
प्रेशर ट्रांसमीटर को प्रेसर ट्रांसड्यूसर भी कहते हैं। ये किसी तरल पदार्थ या फिर गैस ओयल आदि के प्रेशर को मापता है कि लाइन में कितना psi प्रेशर चल रहा है। ये भौतिक ऊर्जा (physical Quantity) को सेंस करके इलेक्ट्रिकल सिग्नल में प्रदान करता है जो सिग्नल हमे आउटपुट में मिलता है ओ mA में मिलता है फिर ये सिग्नल हम अपने PLC में सिग्नल देते है जो हमें अपने कंप्यूटर में digit के रूप में मॉनीटर में देखने को मिलता है कि कितना प्रेशर चल रह है।
ये 24vdc सप्लाई से संचालित होता है आउट पुट में mA मिलता है चित्र में इसके आंतरिक पार्ट्स को भी दिखाया गया है इसमें एक प्रेसर सेंसर होता है जो प्रेसर को सेंस करता है और दूसरा transduction होता है जो प्रेशर को इलैक्ट्रिकल सिग्नल में ट्रांसफर करता है।
चेक करने की विधि
इसको चलाने के लिये 24vdc की जरूरत होती है जो हमें SMPS से मिल जाएगी या फिर PLC से भी मिल जाती है। अगर ये प्रेशर नही बता रहा है तो इसको चेक कैसे करें इसको चेक करने की दो विधियां हैं।
1. पहला 24vdc को ऑन रखो फिर इसके pisitive (+) वायर को टर्मिनल से खोले ध्यान रहे कि टर्मिनलों को टाइट कर दे। फिर मल्टीमीटर को mA पर सेट करें फिर मल्टीमीटर की लाल लीड को खोले हुए पॉजिटिव वायर के साथ लगाएं और काली वाली लीड को पॉजिटिव वाले टर्मिनल पर लगाएं जहां से हमने पॉजिटिव वाली वायर को खोला था। अब आप देखेंगे कि मल्टीमीटर में 4-20mA के बीच mA दिखेगा अगर 4mA दिखाई दिया तो समझ लेना कि प्रेशर 0 शून्य है अगर 20mA दिखाई दिया तो समझ लेना कि प्रेशर फुल 10 bar है क्योंकि जो मैंने ट्रांसमीटर दिखाया है ओ 0-10 bar का है ।
2. दूसरी विधि है test जो टर्मिनल कनेक्शन के साथ मे है चित्र में दिखाया गया है यह सबसे बढ़िया है क्योंकि इसमें कोई डिस्टर्ब नहीं होगा मल्टीमीटर की लाल लीड test के पॉजिटिव (+)पर और काली को (-) पर लगाएं फिर मल्टीमीटर में देखिए कि mA दिख रहा है तो ट्रांसमीटर सही है अन्यथा खराब है।
प्रॉक्सिमिटी सेंसर एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है। जो किसी वस्तु को बिना भौतिक संपर्क किए उस वस्तु की मौजूदगी और गैर मौजदूगी का पता लगाये अर्थात उसकी दिशा में परिवर्तन कर दे। प्रॉक्सिमिटी सेंसर का उपयोग उद्योगों में किया जाता है। इनके कुछ उदाहरण है
* दरवाजे के पास जाने से पहले दरवाजे का खुल जाना
*रेलवे स्टेशन, मॉल में लगी सीढ़ियों के पास जाने पर अपने आप चलने लग जाना
*मोबाइल फ़ोन में proximity सेंसर फोन के डिस्प्ले के पास लगी होती है जैसे हम बात करने के लिए फोन को कान के पास लेकर जाते हैं उसकी स्क्रीन अपने आप ऑफ हो जाती है ये प्रॉक्सिमिटी सेंसर लगे होने के कारण होता है।
प्रॉक्सिमिटी सेंसर के प्रकार:—-
(1) इंडक्टिव प्रॉक्सिमिटी सेंसर
(2) कैपेसिटिव प्रॉक्सिमिटी सेंसर
(3) फोटो इलेक्ट्रिक सेंसर
(1) इंडेक्टिव प्रॉक्सिमिटी सेंसर: —-
इंडेक्टिव सेंसर का उपयोग कई प्रकार के उद्योगों में किया जाता है यह केवल मैटल को ही सेंस करता है जैसे लोहा, एल्यूमिनियम, कॉपर आदि।
इंडेक्टिव प्रॉक्सिमिटी सेंसर का सिद्धांत
इंडेक्टिव सेंसर फ़ैरडे केनियम के सिद्धांत पर काम करता है इस सेंसर को मैने चार भागो में बांट रखा है जैसे:coil,oscilator,schmitt trigger , outputamplifier सेंसर को 24vdc सप्लाई दी जाती है तो इसके ऑस्किलेटर में हाई फ्रीक्वेंसी जनरेट होती है जो क्वाइल को मैग्नेटिक फील्ड जनरेट के लिए इशारा करती है जब कॉइल अपने चारों तरफ मैग्नेटिक फील्ड उत्पन कर देती है तो अब कोई मैटेलिक वस्तु इस चुंबकीय क्षेत्र में आती है तो उस ऑब्जेक्ट या वस्तु में एडी करेंट उत्पन्न होने लग जाता है और उस मैग्नेटिक फील्डको जनरेट होने का विरोध करने लग जाती है जिससे कि ऑस्किलेटर का आयाम (amplitude) कम हो जाता है जिससे कि मैग्नेटिक फील्ड जनरेट नहीं कर पाता है और जैसे जैसे वस्तु magnetic फील्ड नजदीक आती है ऑस्किलेटर का amplitude और कम हो जाता इस तरह schmitt ट्रिगर oscilator की इस मूवमेंट अर्थात इसमें हुए परिवर्तन को पता लगाता है और आऊटपुट एंप्लीफायर को सिग्नल देता है इस तरहआउटपुट एंप्लीफायर इस सिग्नल से लोड को चालू और बंद करता है। ये इंडक्शन वाले गुण केवल धातु में ही पाए जाते हैं इसलिए इससेंसर का उपयोग मुख्य रूप से धातु के लिए किया जाता है
(1) इसका उपयोग प्लास्टिक, रबर,या अन्य गैर धातु वस्तुओं का पता लगाने के लिए नहीं किया जाता है ।
(2) इंडेक्टिव सेंसर धूल भरे वातावरण में सही तरीके से काम करते हैं।
(3) कोई जरूरी नहीं है कि प्रॉक्सिमिटी सेंसर सीधे संपर्क में आने वाली वस्तुओं को ही सेंस कर ओ घूमती हुई वस्तु को भी सेंस कर लेती है।
(4) जब सेंसर के संवेदनशील प्वाइंट के सामने कोई वस्तु नहीं होगी तो उसकी LED संकेत नहीं देगी
(5) जब सेंसर के सामने कोई वस्तु होती है तभी ओ वस्तु की उपस्थिति को दर्शाती है।
सेंसर में ऑस्किलेटर क्या होता है
सेंसर में ऑस्किलेटर को डायरेक्ट करेंट से विद्युत धारा दी जाती है और यह एक बदलती हुई अल्टरनेटिक करेंट उत्पन्न करती है जिससे क्वाइल अपने चारों तरफ चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होती है।
ट्रिगर का काम होता है ऑस्किलेटरों में परिवर्तन को समझना और आउट पुट सिग्नल देना।
Capacetive proximity sensor:—–
कैपेसिटिव सेंसर वह सेंसर होता है जो किसी वस्तु को बिना संपर्क किए उसकी मौजदूगी तथा गैर मौजदूगी का पता लगा लेता है और उसकी दिशा में परिवर्तन कर देती है । बड़ी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि यह सेंसर मैटल और नॉन मैटल दोनों को सेंस करती है नॉन मैटल में जैसे लकड़ी, रबर,प्लास्टिक,ऑयल, सीसा, आदि।
कार्य करने का सिद्धांत:—-
कैपेसिटिव सेंसर इंडेक्टिव सेंसर की तरह होता हैऔर ये कैपेसिटेंस के सिद्धांत पर कार्य करती है ये भी चार भागो में बाटा गया है बस इसमें क्वाइल की जगह कैपेसिटर लगा हुआ है इसी कारण इसका नाम कैपेसिटिव सेंसर कहते है जैसे output amplifeire,schmitt trigger,oscilatore,capacitor अंतर यह है कि इंडेक्टिव सेंसर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड जनरेट करती है और केवल मैटल को सेंस करती है, कैपेसिटिव सेंसर में electrostatic फील्ड जनरेट होती है और ये मैटल और नॉन मैटल दोनों को सेंस करती है जैसे: लकड़ी प्लास्टिक आदि। चित्र में कैपेसिटर सेंसर को तीन भागों में बंटा गया है जिसमें सेंसर के सर्फेस के साथ oscilator के साथ ही कैपेसिटर लगा हुआ है जिसके कारण इसका नाम कैपेसिटिव सेंसर पड़ा।oscilator हाई फ्रीक्वेंसी जनरेट करती और इसी के कारण कैपेसिटर अपने आस – पास electrostatic फील्ड जनरेट करती है जैसे कि चित्र में दिखाया गया है
जैसे- जैसे वस्तु उस फील्ड के क्षेत्र में आती है तो oscilatore को electrostatic फील्ड जनरेट करने में ज्यादा दबाव पड़ता है और इसका आयाम कम होता जाता है एक निश्चित सीमा पर जाकर इसका आयाम बहुत कम हो जाता है जिसके कारण oscilator बंद हो जाता है और इस oscilator में हो रहे परिवर्तन को स्मिट ट्रिगर रीड करता है और सिग्नल आउटपुटएंप्लीफायर को भेजता है और आऊटपुट लोड को चालू और बंद करता है ।
फोटो इलेक्ट्रिक्सेंसर:- – –
यह एक ऐसा उपकरण है जो प्रकाश का इस्तेमाल करके वस्तु को महसूस करता है वस्तु की उपस्थिति और अनुपस्थित का पता लगाता है। यह बाहरी प्रकाश का इस्तेमाल नहीं करता है। ये तीन प्रकार के होते हैं:- – –
1.Through beam sensor
2.Retro reflective sensor
3.Diffuse reflective type sensor
(Through beam sensor)
थ्रो बीम सेंसर एक ऐसा सेंसर है जो प्रकाश के सिद्धांत पर कार्य करता है। इसमें एक एमेटर ट्रांसमीटर होता है जो प्रकाश उत्पन्न करता है दूसरा रिसीवर जो प्रकाश को प्राप्त करता है यह प्रकाश सीधी रेखा में होता है जो रिसीवर की तरफ जाता है जब इनके बीच मे कोई वस्तु आ जाती तो प्रकाश को रिसीवर तक पहुंचने में बाधित करता है तो रिसीवर प्रकाश की अनुपस्थित का पता लगा लेता अर्थात वस्तु को डिटेक्ट करके आउटपुट को सिग्नल प्रदान करता है कि कोई वस्तु बीच में आ गई है इसके अनुसार आउटपुट लोड को चालू और बंद करता है
थ्रो बीम सेंसर के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें
* थ्रो बीम सेंसर अपने लम्बी रेंज के लिए पहचाना जाता है। इसका उपयोग अक्सर ऑटो मोटिव और पैकेजिंग मशीनों जैसे उद्योग में किया जाता है। यह सेफ्टी के तौर पर भी काम में लाया जाता है।
*थ्रो बीम सेंसर में ट्रांसमीटर और रिसीवर एक दूसरे के बिल्कुल सीधे में लगा होना चाहिए नहीं तो आउटपुट देने में विफल हो जाएगा।
*आउटपुट सिग्नल सेंसर के प्रकार पर निर्भर करता पॉजिटिव (+) दे रहा है या नेगेटिव (-) हमने सर्किट को कैसे चलाना है।
*इनका रख रखावकरने की आवश्यकता कम ही पड़ती है।
*यह प्रदूषित तथा नमी वाले स्थान पर सही ढंग से काम करता है
( Retro reflecter type sensor)
रेट्रो रिफ्लेक्टिव सेंसर में ट्रांसमीटर और रिसीवर एक ही डिवाइस में बने होते हैं तथा इनकी सीधी रेखा में एक रिफ्लेक्टर लगा होता है जो कांच या फिर किसी चमकदार वस्तु की हो सकती है। जब ट्रांसमीटर से प्रकाश निकल कर रिफ्लेक्टर पर पड़ती है तो रिफ्लेक्टर प्रकाश को परिवर्तित कर देती है जब यह प्रकाश वापस रिसीवर पर नहीं जा पाती किसी वस्तु के बीच मे आ जाने से तो रिसीवर सिग्नल आउटपुट को देता है कि कोई वस्तु बीच में आ गई है इसके अनुसार ही आउटपुट लोड को चालू और बंद करता है।
उपयोग:- – –
इसका उपयोग अप्रकाशित सड़कों और जल मार्ग के चीन्हो के रूप में किया जाता है।
( Diffuse reflecter type sensor)
डिफ्यूज रिफ्लेक्टर सेंसर में ट्रांसमीटर और रिसीवर एक ही हाउसिंग में बने होते है इनको रिफ्लेक्टर की आवश्यकता नहीं होती है इस सेंसर की पहचान सीमा निश्चित होती है। क्योंकि यह ओबजेक्ट के आकार और रंग इसको प्रभावित करता है रिसीवर कितनी अच्छी तरह से प्रकाश को रीड कर सकता है।
*जब सेंसर का ट्रांसमीटर प्रकाश उत्सर्जित करता है तो यह प्रकाश आमतौर पर लाल रंग का होता है
*जब प्रकाश की किरण वस्तु पर पड़ती है तो परिवर्तित होकर सेंसर के रिसीवर पर वापस लौटती है तो सेंसर परिवर्तित प्रकाश की किरण की गति को मापती है कि कितनी गति से प्रकाश की किरण वापस रिसीवर पर आती है।
*यदि वस्तु प्रकाश की किरण की तरफ बढ़ती है तो सेंसर स्विचिंग सिग्नल हो जाती है जिस से लोड चालू और बंद होता है।
फोटो इलेक्ट्रिक सेंसर में एक खास बात जानना बहुत ही जरूरी है light on mode और dark on mode
लाइट ऑन मोड जब ट्रांसमीटर और रिसीवर के बीच मे वस्तु आ जाती है तो सेंसर की लाइट बंद हो जाती है तब रिसीवर अपनी आउटपुट सिग्नल दे देता है ।
डार्क ऑन मोड जब ट्रांसमीटर और रिसीवर के बीच मे कोई वस्तु आ जाती है तो सेंसर की लाइट ऑन हो जाती है तब रिसीवर अपनी सिग्नल दे देता है जिसके कारण लोड चालू और बंद हो जाती है यह मशीन के ऑपरेशन पर निर्भर करता है की कैसे वर्क कराना है।यह सैटिंग ट्रांसमीटर के ऊपर पिन सेट लगा होता है चित्र में दिखाया गया है
।ये सेंसर npn और pnp हो सकते कौन सा आयोग में लाना है ये plc के कार्ड रिले पर निर्भर करता है
थर्मोकॉपल एक टेंप्रेचर सेंसर इलेक्ट्रिकल उपकरण है इसे टेंप्रेचर ट्रांसड्यूसर भी कहते हैं। यह किसी भट्टी या किसी इंजन का टेंप्रेचर सेंस करके उसे इलेक्ट्रिक फॉर्म में परिवर्तित करके जानकारी प्रदान करे कि उसका टेंप्रेचर कितना है इसका सिग्नल हमे mV मे मिलता है
जो इसका चित्र नीचे दिखाया गया है
आंतरिक संरचना:- – – ये अलग-अलग दो धातुओं से मिलकर बना होता है”k’ टाइप थर्मोकॉपल है इसमें एक धातु क्रोमियम और दूसरी एल्यूमिनियम को आपस में जोड़ के बनाते है जिस जंक्शन पर ये धातु एक दूसरे से जुड़ते हैं उसे hot 🔥 जंक्शन कहते हैं उसी प्वाइंट को हम गर्म करते हैं जो जंक्शन खुला रहता है जहां पर हम उन वायरों को जोड़ते हैं जिससे हमें फ़ीडबैक मिलती है उसे कोल्ड 🥶 जंक्शन कहते हैं जैसे कि नीचे चित्र में दिखाया गया है
थर्मोकॉपल को चेक करने की विधिः- –
थर्मोकॉपल को चेक करने के लिए इसके हॉट जंकशन को किसी मोमबत्ती या अन्य किसी साधन से गर्म करें जब आप इसे गर्म करोगे तो इसमें mV डीसी में जनरेट होगी ओ वोल्टेज 25-30mV में होगी अगर इस से कम हुई तो थर्मोकॉपल को बदलने की आवश्यकता है। इसके वोल्टेज को चेक करने के लिए मल्टीमीटर ले उसको mV पर सेट करे फिर थर्मोकॉपल को गर्म करें फिर मल्टीमीटर की लाल लीड को पॉजिटिव (+) और काली लीड को नेगेटिव (-) पर लगाएं फिर मल्टीमीटर की डिस्प्ले में देखिए कि कितनी वोल्टेज दिखाई दे रही है। इस तरह थर्मोकॉपल का सही गलत का निर्धारण किया जा सकता है।
थर्मोकॉपल के बारे में कुछ खास जानकारी:–
1. थर्मोकॉपल का आउटपुट सिग्नल डीसी mV मे होता है।
2. ये टेंप्रेचर को नापने के काम आता है।
3. इसको चेक करने के लिए cuontinouty भी कर सकते हो।
4. अगर इसकी आउटपुट voltage 25-30mV से कम नहीं होनी चाहिए।
5. ये दो अलग -अलग धातुओं से मिलकर बना होता है।6. उसमें दो जंक्शन होते है एक ठंडा दूसरा गर्म इन्ही दोनों के बीच के अनुपात की गणना थर्मोकॉपल करता है।
RTD का फुल फॉर्म होता है (Resistance temperature detecter) यह एक सेंसर है जिसका प्रतिरोध तापमान में बदलाव के साथ बदलता रहता है अर्थात जैसे जैसे हम RTD को गर्म करते रहेंगे वैसे वैसे इसका तापमान बढ़ता इसके साथ ही इसका प्रतिरोध (resistance) बढ़ता रहेगा। यह ohm law के सिद्धांत पर कार्य करता है। T perpotional R
RTD के बारे में कुछ खास बातें:—
1.RTD सेंसर धातु के प्रतिरोध के सिद्धांत पर कार्य करता है धातु का प्रतिरोध तापमान के साथ बदलता रहता है।
2. RTD सेंसर की सटीकता, दोहराव और स्थिरता के लिए इसकी अहमियत है।
3. RTD सेंसर को बनाने के लिए कांच या सिरामिक के टुकडे पर कई बार महीन तार लपेटा जाता है इस तार को शुद्ध पदार्थों से बनाया जाता है जैसे कि प्लेटिनम, निकल, तांबा।
4. प्लेटिनम RTD सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला RTD है इसके बाद निकेल, तांबा RTD आते हैं।
RTD का इस्तेमाल तापमान मापने के अलावा, दबाव, आद्रता मापने के काम आता है
5. इसका आउटपुट सिग्नल ओहम में होती है।
ये RTD दो प्रकार के होते हैं:- – –
(1) Simplex (2) Duplex
*Simplex RTD
सिम्प्लेक्स सेंसर में एक एलिमेंट होता है। इसके दो सिरे बाहर आए होते हैं, इसलिए इसे 2वायर RTD कहते हैं जैसे कि चित्र में दिखाया गया है
Simplex 3wire RTD
इसमें तीसरा वायर दूसरे सिरे के वायर से ही जोड़ कर बाहर आया होता है जिसे हम कम्पनसेट वायर भी बोलते हैं ये इसलिए लगाया जाता है कि एक के विफल हो जाने पर काम करने में सक्षम रहे।
*Duplex RTD
इसी तरह डुप्लेक्स RTD सेंसर होता है एक तत्व के बजाय दो इसके हॉट एंड पर दो RTD/ pt100 एलिमेंट होते हैं जैसे कि चित्र में दिखाया गया है
इसका उपयोग बड़े इंडस्ट्री प्रक्रिया के लिए किया जाता है। डुप्लेक्स में एक 6 वायर वाला RTD भी होता है जो कि आगे चित्र में दिखाया गया है
इसने 3, 6नंबर वायर कम्पनसेट वायर के तौर पर काम करता है।
RTD को इंडस्ट्री में pt 100के नाम से भी जानते हैं क्योंकि यह एलिमेंट प्लेटिनम की धातु से बना होता है इसलिए इसे pt 100 RTD कहते है।
*pt 100= -200सेंटी ग्रे to 850सेंटीग्रेटी
*pt1000= -200 to 260सेंटीग्रेट
Nickel RTD=-80 to 150सेंटीग्रेट
Copper RTD= -50 to 150सेंटीग्रेट
Note: pt100 RTD का मतलब जब 0सेंटीग्रेट टेंप्रेचर होगा तो उसका रेजिस्टेंस 100ओहम दिखाएगा।
अगर हम RTD को किसी कमरे में या और किसी जगह पर इसका रेजिस्टेंस चेक कर रहे हैं तो उस समय ओ उस जगह का टेंप्रेचर माप के रेजिस्टेंस दिखाएगा
अगर उस समय इसका रेजिस्टेंस 110ओहम दिखा रहा है तो उस जगह का actual टेंप्रेचर क्या है उसका फार्मूला है T=Rt-R0/perpotional sign value= 0.385 s
इसलिए 110- 100/0.385=30सेंटीग्रेट है ।
चेक करने की विधि
*मल्टीमीटर को ohm मोड पर सेट करो अब इसको गर्म करो फिर मल्टीमीटर की पॉजिटिव लीड को पॉजिटिव पर काली लीड को नेगेटिव लगाओ अगर इसके रेजिस्टेंस में बदलाव आ रहा है तो RTD ठीक है।
*मल्टीमीटर की सहायता से इसकी कंटीनॉटी भी मार सकते है अगर बीप की आवाज आ रही है तो RTD ठीक है अगर OL बता रहा है तो खराब है इसको बदलने की आवश्यकता है।
RCCB का फुल फॉर्म (Residual current cercuit breaker) होता है। इसको हम ELCB भी कहते हैं पर आज के मॉडर्न टेक्निकल युग में RCCB ज्यादा उपयोग युक्त है। यह एक विद्युत सुरक्षा उपकरण हैं जो हमें विद्युत के झटके से बचाता है और अर्थ लीकेज करेंट से प्रोटेक्शन देता है।
इसके फायदे
1. यह लिकेज करेंट का पता लगाता है।
2 यह हमें विद्युत झटके से बचाता है।
3. यह अर्थ फॉल्ट प्रोटेक्शन देता है।
4. यह करेंट अनबैलेंसिंग को बहुत जल्दी पहचान लेता है जिससे कि बहुत कम समय के अंतराल में सर्किट को बंद कर देता है।
RCCB के बारे में महत्त्वपूर्ण जानकारी
1. यह दो और चार पोल में ही होते हैं।
2. यह विद्युत धाराओं में असंतुलन का पता लगाने और सर्किट को ब्रेक करने के लिए किया जाता है।
3. यह फेज और न्यूट्रल के बीच बहने वाले करेंट की निगरानी रखता है।
4. यह घरेलू उपकरण में करेंट लीकेज के कारण लगने वाले झटके से बचाता है।
5. यह सर्किट ट्रिप करने के लिए किया जाता है जब अर्थ वायर में करेंट फ्लो की खराबी को पाया जाता है।
6. इसमें ek टेस्ट बटन होती है जिसको दबाने से rccb ट्रिप कर जाती है और हमें यह पता भी चल जाता है कि RCCB सही है कि नहीं।
7. यह AC,A,B टाइप की होती है ।AC टाइप की AC सप्लाई में और A टाइप का Ac और पलस्टिंग सप्लाई में और B Type को ac और dc दोनों सप्लाई में उपयोग किया जाता है।