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  • एमसीसीबी क्या होता है?

    एमसीसीबी क्या होता है?  एमसीसीबी को गैर स्वचालित साधनों मे सर्किट को बंद करने या खोलने के लिए किया जाता है, साथ ही प्रमुख ओवर करेंट को ऑटोमैटिक रूप से खोलने के लिए या शॉर्ट सर्किट होने पर खुद को नुकसान पहुंचाएं बिना सप्लाई को बंद कर देती है। उसे एमसीसीबी कहते हैं।(Molded case Circuit breaker) इसका पूरा नाम है।mccb, MCB की उच्च मोडिफिकेशन डिवाइस है। MCCB आमतौर पर 32एम्पीयर 1600एम्पीयर तक उपलब्ध होती हैं 230वोल्टेज से

    1.1केवी के वोल्टेज रेंज के साथ आते हैं।

    1. आर्क चूयूट2. मूविंग कॉन्टैक्ट 

    3. ऑपरेटिंग मैकेनिज्म 

    4.बेस कवर

    5. टर्मिनल कॉन्टैक्ट 

    6. ओवर लोड ट्रिप या बायोमेटलिक कॉन्टैक्ट 

    7. हैंडल नॉब 

    8. मैनुअल ट्रिप button 

    9. करेंट ट्रांसफार्मर असेंबली 

    एमसीसीबी के प्रकार – – 

    1.A                            2.3

    2.B                             3.5

    3.C                             5.10   

    4.D                              10.20

    5.K                                8.12

    6.Z                                 2.3           

    एम सीसीबी का काम करने का सिद्धांत 

    थर्मल ओवर लोड  एमसीसीबी तापमान संवेदन शील उपकरण के माध्यम से थर्मल ओवरलोड की सुरक्षा करता है। यह स्थिति तब होती है जब कंडक्टर और इंसुलेशन के बीच तापमान इकठ्ठा हो जाता है तो एमसीसीबी में एक बायोमेटलिक धातु होती है। जब ओ ज्यादा गर्म हो जाती है तो वह गर्म होकर मूड जाती है और ट्रिप बार को धक्का लगाती है एवं विद्युत प्रवाह को रोक देती है।

    शॉर्ट सर्किट   शॉर्ट सर्किट में एमसीसीबी में सोलोनॉयड कॉइल होती है जो इलेक्ट्रोमैग्नेट के सिद्धांत पर कार्य करती है। शॉर्ट सर्किट के समय सोलोनॉयड के माध्यम से एक विस्तृत श्रृंखला प्रवाहित होती है (A wide range of current) जिससे एक मजबूत विद्युत चुंबकीय क्षेत्र का निर्माण होता है जिससे उसने ट्रिप बार को आकर्षित किया और अंत में करेंट कॉन्टैक्ट को खोल दिया।

    अर्थ फॉल्ट प्रोटेक्शन  *   एमसीसीबी में आंतरिक आर्क डिस्पेशन तकनीक होती है जो आपातकालीन स्थिति में स्विच को डिस्कनेट करने में मदद करती है इसका उपयोग इलेक्ट्रिकल स्विच में किया जाता है जहां पर करेंट फ्लो को डिस्कनेक्ट करने के लिए मैनुअल रूप से एमसीसीबी आर्क को खींचा जाता है।

     (   एमसीसीबी का संचालन तंत्र  )

    *थर्मल मैग्नेटिक रिलीज – – इसका उपयोग विद्युत चुंबकीय और बायोमेटल असेंबली में ओवर करेंट सुरक्षा प्रदान करता है।

    *इलेक्ट्रॉनिक रिलीज:- स्टैटिक या इलेक्ट्रॉनिक रिलीज एमसीसीबी ओवर करेंट से सुरक्षा प्रदान करने के लिए  इलेक्ट्रॉनिक सर्किटरी का उपयोग करता है।

    *माइक्रोप्रोस्ट रिलीज:- – माइक्रोप्रोसेर रिलीज एमसीसीबी वर्तमान में स्थितियों से बचने के लिए किया एक माइक्रोप्रोसेसर लगा होता है।

    एमसीसीबी के फायदे 

    *एमसीसीबी लगाने से शॉर्ट सर्किट होने पर ट्रिप हो जाता है जिसे की सप्लाई कट जाती है और हमारी मोटर या और भी इलेक्ट्रिकल डिवाइसों का नुकसान होने से बच जाता है।

    *एमसीसीबी मेंएक एम्पीयर सेटिंग पिन सेट होता है जिसको हम अपने जरूरत के अनुसार एम्पीयर सेट करते हैं इससे ज्यादा करेंट होने पर एमसीसीबी ट्रिप हो जाती है और हमारी सप्लाई डिस्कनेट हो जाती है।

    *एमसीसीबी में एक और सबसे महत्त्वपूर्ण फायदा है वह इसको हम मैनुअल ऑन/ऑफ कर सकते हैं।

    *इसमें एक टेस्ट पुश बटन लगा होता जिसको प्रेस करेंगे तो इसकी जो ऑन/ऑफ नॉब है ओ ट्रिप की जगह खिसक कर आ जाएगी इससे हम ये जान सकते हैं हमारा एमसीसीबी पूरी तरह से सही है अर्थात काम कर रहा है।

  • फ्यूज क्या होता है?

    फ्यूज क्या होता है:—

    इलेक्ट्रिकल क्षेत्र में फ्यूज एक ऐसा उपकरण है जो इलेक्ट्रिकल डिवाइस को खराब होने से बचाता है। यह पावर लाइन या फिर कंट्रोल सर्किट मे लगता है जिसमें एक पतली तार के बीच मे से धारा बहती है जब सर्किट मे कोई शॉर्ट सर्किट हो जाती है तो यह पतली तार गल जाती है जिससे कि सर्किट ब्रेक हो जाती है और इलेक्ट्रिकल के महंगे डिवाइसों का नुकसान होने से बच जाता है।

    सेमीकंडक्टर फ्यूज:—

    सेमीकंडक्टर फ्यूज को अल्ट्रा रैपिड फ्यूज या हाई स्पीड फ्यूज या रेक्टिफायर फ्यूज भी कहते है सेमीकंडक्टर फ्यूज एक हाई स्पीड करेंट लिमिटिंग फ्यूज है जो अर्क वोल्टेज को कम करके संवेदनशील सेमीकंडक्टर उपकरण जैसे थायरिस्टर डायोड scr आदि को सुरक्षित रखता है सेमीकंडक्टर फ्यूज आमतौर पर 125से 2100वोल्ट तक होते है ये अलग -अलग प्रकार के अलग अलग आकार के होते हैं। इसमें एक चांदी की पतली तार होती है जो कि विद्युत की बहुत अच्छी चालक होती है।

    सेमीकंडक्टर फ्यूज क्लासेस: —

    सेमीकंडक्टर फ्यूज को तीन भागों में बंटा गया है जो फ्यूज की ब्रेकिंग विशेषता रखते हैं aR,gR,gS है ये फ्यूज अकसर फ्यूज के ऊपर लिखे होते हैं जैसे कि ऊपर चित्र में  लाल घेरे में दिखाया गया है। ताकि आपको इसको पहचानने मे मदद मिले सके। इस तरह के फ्यूज ज्यादा संवेदनशील उपकरण के बचाव के लिए लगाए जाते हैं जैसे थायरिस्टर डायोड scr आदि।

    aR क्लासेस फ्यूज 

    aR क्लासेस फ्यूज केवल पावर कंडक्टर शॉर्ट सर्किट से सुरक्षा प्रदान करते हैं। aR फ्यूज gR और gS के तुलना में ज्यादा तेज होते हैं gR क्लास फ्यूज के प्रतिस्थापन मे aR फ्यूज का उपयोग नहीं किया जा सकता है।

    gR क्लासेस फ्यूज 

    gR क्लास फ्यूज का उपयोग केबल इंस्टालेशन के सभी स्विच गियरों की सुरक्षा के लिए और ओवरलोड और शॉर्ट सर्किट प्रोटेक्शन के लिए किया जाता है जहां पर aR फ्यूज लगा हो वहां पर gR क्लास के फ्यूज को प्रतिस्थापित कर सकते हैं।

       gS क्लासेस फ्यूज 

    gS और gR फ्यूज क्लास के फ्यूज के समान होते हैं ये दोनों ओवरलोड और शॉर्ट सर्किट से सुरक्षा प्रदान करते हैं लेकिन सख्त पिघलने वाले गेट मूल्यों के कारण gS क्लास फ्यूज में gR फ्यूज की तुलना में बिजली अपव्यय कम होती है ।

      आंतरिक संरचना:

          जैसा कि ऊपर चित्र में दिखाया गया है कि फ्यूज के अंदर से एक सफेद रंग का पाउडर रहा है ये फ्यूज की वायर को ठंडा रखती है तथा जब शॉर्ट सर्किट होती है तो फ्यूज को फ्लैश होने से बचाता है ताकि और किसी फेज या डिवाइस को नुकसान न पहुंचे। एक कॉपर की पतली सी पत्ती दिख रही है उसी के बीच मे चांदी की पतली कसी तार होती है जो फ्यूज का काम करती है।

     चेक करने की विधि:—

    1.फ्यूज को हम एक तो मल्टीमीटर की मदद से कंटीन्यूटी मार कर चेक कर सकते हैं अगर कंटीन्यूटी से मल्टीमीटर में बीप की आवाज आ रही है तो फ्यूज ठीक है अगर नहीं आ रही तो फ्यूज उड़ चुके हैं।

    2. फ्यूज में हम सप्लाई देकर भी चेक कर सकते हैं एक तरफ सप्लाई निकल रही है तो फ्यूज सही है अन्यथा ख़राब है।

    3. तीसरा सबसे बढ़िया है सेमीकंडक्टर फ्यूज को चेक करने आप सबसे ऊपर वाले चित्र में देखेंगे कि फ्यूज के ऊपर pin tube अगर ओ नीचे दबी है तो फ्यूज ठीक है अगर ऊपर उठा हुआ है तो फ्यूज उड़ चुका है जैसे कि चित्र में ट्यूब ऊपर की तरफ उठी हुईं है यानि कि ये खराब हो चुका है।

  • एसीबी क्या है।

    एसीबी ACB :- इसका फुल फॉर्म (Air cercuit breaker) यह एक विद्युत उपकरण है यह विद्युत सर्किट को ज्यादा करेंट से बचाता है यह ऑटोमैटिक स्विच होता है। यह असामान्य परिस्थितियों में उच्च धाराओं को सुरक्षित रूप से रोक देता है।

    एसीबी दो प्रकार के होते हैं( 1) EDO (2)MDO

    EDO(eletronic draw out) इसमें एसीबी को हैंडल से चार्ज नहीं करना पड़ता है इसकी स्प्रिंग ऑटोमैटिक चार्ज हो जाती है।

    MDO(machenical draw out) इसमें एसीबी के हैंडल को ऊपर नीचे करके स्प्रिंग को चार्ज करना पड़ता है  फिर ऑन पुश बटन को दबाना पड़ता है। जब तक स्प्रिंग चार्ज नहीं तब तक एसीबी ऑन नहीं होगा।

    ACB के फायदे 

    1. यह कम वोल्टेज वाले विद्युत सर्किट की सुरक्षा करता है।

    2. यह शॉर्ट सर्किट,और ओवर करेंट, अर्थ ग्राउंड से सुरक्षा प्रदान करता है।

    3. यह हमें विद्युत आर्क से बचाता है। विद्युत आर्क वह होता है जब हम एसीबी को ऑन करते हैं तो एसीबी के पावर कॉन्टैक्ट से कुछ इलेक्ट्रिकल स्पार्क होता है उसी को खत्म करने के लिए एयर के सहायता लेते हैं इसी कारण से इसका नाम भी एयर सर्किट ब्रेकर पड़ा है।

    4. इसका उपयोग हम कारखानों और फैक्ट्रियों में करते हैं। ये 415V से ऊपर के वोल्टेज के लिए लगाया जाता है।

    5. इसको हम मैनुअल और रिमोट दोनों विधि से ऑन ऑफ कर सकते हैं।

    एसीबी में रिले के प्रकार:–

    1.shunt coil or shunt relay 

    2.UVR(under voltage relay)

    3.closing relay 

    4.Micrological controller relay 

    1.shunt relay- 

    Acb tripping by the remote some distances from the panel protection the short cercuit of the technician 

    2.UVR(under voltage relay) when voltage high/low ACB will Trip.

    3.Closing relay — ACB “ON”by the remote .

    4. MICROLOGICAL CONTROLLER RELAY –

    1.Ir(over load settingये सेटिंग ओवर लोड के लिए किया जाता है। अगर मान लो कि आपकी एसीबी 1000एम्पीयर की है और आपका लोड उससे कम चल रहा है तो आप इसकी सेटिंग कर सकते है जितने एम्पीयर की आपको जरूरत है इससे ज्यादा करेंट होने पर ये एसीबी को ट्रिप कर देगी जैसे कि मान लो कि आपके Ir सेटिंग.6पर सेट है तो आप निकाल सकते हो कि आपकी एसीबी पर कितना लोड चल रहा है  इसके लिए जितने एम्पीयर का एसीबी है In (rated of current Acb)1000*.6=600amp चल रहा है। ये सेकंड में ट्रिप करता है।

    2.Isd(short cercuit settingमान लो आपके एसीबी पर 600amp लोड चल रहा है और आपका Isd के नॉब की सैटिंग 1.5पर है तो Ir*1.5 मतलब 600*1.5=900amp से ऊपर शॉर्ट सर्किट होने पर एसीबी को mili सेकंड में ट्रिप कर देगा जितने मिली सेकंड पर ट्रिप करवाना है उतने पर डिले टाइमर को सेट कर दो उतने सेकंड में ट्रिप कर देगा।

    3.Ig(ground foulty) जब सर्किट कहीं पर अर्थ या ग्राउंड हो जाए तो उस कंडीशन में ट्रिप कर जाती है। ये भी मिली सेकंड में ट्रिप करती है।

    4.Ii(Instantaneous current) माना की आपकी एसीबी 1000amp की है और किसी कारण से शॉर्ट सर्किट या अर्थ फॉल्ट हो जाता है और एसीबी की Ii सेटिंग 2पर है तो इसका मतलब 2*1000=2000amp पर जाने पर ये तुरंत एसीबी को टॉट्रिप कर देगी बिना टाइम लिए इसका कोई टाइमर सेटिंग नहीं होता है जैसे कि चित्र में दिखाया गया है।

     इसको off/on करने की विधि एवं आंतरिक भाग और बाहरी पार्ट की जानकारी।

    इसकी मेंटेनेंस करने के लिए सबसे पहले पॉवर off करने के लिये लाल पुश बटन को दबाना है।

    ON करने के लिए पहले जो हैंडल आप चित्र में देख रहे हैं उसको ऊपर नीचे करके स्प्रिंग को चार्ज करें जब स्प्रिंग चार्ज्ड हो जाएगा तो हैंडल लूज भी हो जाएगा और सफेद रंग में charged लिख कर आ जाएगा। फिर आपने हरे रंग के पुश बटन को दबा दे एसीबी में खटाक के आवाज आएगी और ऑन का इंडिकेशन आ

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